हाईकु-एकादश

Rajendra jain

रचनाकार- Rajendra jain

विधा- हाइकु

हालातों की जब भी बात हुई किसान की हालत किसी से छिपी नही है इतिहास बताता है विदेशियों के आने के पूर्व यहाँ सभी कुछ समृद्ध था मगर जो कुछ हुआ इतिहास गवाह है इन्ही भावों को हमने संक्षिप्त विधा हाईकु मे कहने का प्रयास किया है देखिएगा……

हाईकु-एकादश

हालात देखें
भारतीय किसान
कैसे रहता

विदेशी पूर्व
इतिहास ठीक था
बाद बिगड़ा

हमारे देश
जमीनदार नही
ईमानदार

जमीनदारी
विदेशियों की नीति
लूटमार की

कृषि उत्पाद
पशु पालन आदि
आज वेहाल

जीवन देता
अन्नदाता किसान
हम क्या देते

अव मूल्यन
कृषि घाटे का सौदा
प्रगति कैसे

उत्तम किस्म
उत्पाद बड़ाईए
निर्यात हेतु

अधिक मिले
सरकारी बजट
कृषि के लिए
१०
अपना देश
ऋषि कृषि संस्कृति
क्लेश न लेश
११
सच मानिए
कृषक से जीवन
वरना जड़

राजेन्द्र'अनेकांत'
बालाघाट दि.२०-०२-१७

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Rajendra jain
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प्रकृति, पर्यावरण, जीव दया, सामाजिक चेतना,खेती और कृषक की व्यथा आदि विषयों पर दोहा, कुंडलिया,चोपाई,हाईकु आदि छंद बद्ध तथा छंद मुक्त रचना धर्मिता मे किंचित सहभागिता.....
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