हाईकु अष्टक

Rajendra jain

रचनाकार- Rajendra jain

विधा- हाइकु

आज के दिन पर देखिए हमारे हाईकु कुछ इस तरह

हाईकु-अष्टक

प्रेम ही पूजा
प्रेम के लिए लिखें
प्रेम समझ

प्रेम जब ही
प्रकृति के रँग मे
रंगें तब ही

सभी दिन हैं
शुभ दिन कोई न
प्रेम बिन है

उनकी रीत
वेलेंटाईन दिन
उनकी प्रीत

प्रेम की रीत
जनम जनम की
हमारी प्रीत

फूहड़ता है
वेलेंटाईन दिन
आज जो यहाँ

खुद को भूल
प्रेम की नकल है
आल जुलूल

हमारे यहाँ
स्थाई प्रेम के रिस्ते
वो और कहाँ

राजेन्द्र'अनेकांत'
बालाघाट दि.१४-०२-१७

Views 2
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Rajendra jain
Posts 20
Total Views 110
प्रकृति, पर्यावरण, जीव दया, सामाजिक चेतना,खेती और कृषक की व्यथा आदि विषयों पर दोहा, कुंडलिया,चोपाई,हाईकु आदि छंद बद्ध तथा छंद मुक्त रचना धर्मिता मे किंचित सहभागिता.....

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia