हाइकू !

kamni Gupta

रचनाकार- kamni Gupta

विधा- हाइकु

१.
प्रकृति आपदा

हर पल है
डरे मानव अब
बचाए कौन !

२.
असंतुलन
प्रकृति का प्रकोप
समझो अब !

३.
ये प्रदूषण
हरियाली सिमटे
पेड़ बचाओ !

कुप्रथा

१.
क्यूं रुढ़िवाद
करे खोखली जड़ें
पीड़ित कहें !

२.

बदलो उन्हें
बन बेड़ी जो यूंही
उन्नति रोके !

प्रिय की प्रशंसा

१.
तुम्हीं से अब
जीवन मेरा यह
भूल न जाना !

२.

ज़िन्दगी मेरी
अमानत तुम्हारी
न जुदा होना !

जीवन दर्शन

१.
दुनिया यह
जानते सब मगर
माया में फँसे !

२.
सुख औ दुख
मिश्रण जीवन का
संघर्ष बड़ा !

कामनी गुप्ता***
जम्मू !

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kamni Gupta
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I am kamni gupta from jammu . writing is my hobby. Sanjha sangreh.... Sahodri sopan-2 Deepshikha Satyam prabhat Mehkte lafz.

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