** हाइकु **

पं.संजीव शुक्ल

रचनाकार- पं.संजीव शुक्ल "सचिन"

विधा- हाइकु

नेता चोर व चाई
लगते भाई भाई
करते खुब कमाई।

आरक्षण का जोर
अज्ञानता चहुंओर
भ्रष्टाचार पुरजोर।

धर्म की दुहाई
गाढी कमाई
संस्कृति से रूसवाई।

ज्ञान का प्रचार
शिक्षा का ब्यापार
यह कैसा संसार।

आज की पढाई
नैतिकता की विदाई
प्रगतिशीलता की दुहाई।

सिमटते परिधान
सिकुड़ते परिवार
नवीनता का पहचान।

रक्षक भक्षक साथ
वहीं तो करता घात
कैसी है ये जात।

©®पं.संजीव शुक्ल "सचिन"

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पं.संजीव शुक्ल
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मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है।

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