* हां कृष्ण कन्हैया हूं मैं *

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

हां कृष्ण कन्हैया हूं मैं अच्छा है आपने
मेरे मोहन का रूप तो देखा मुझमे
पर तुम क्यों कंस का रूप धरते हो
ईर्ष्या में परवश होकर नाहक जलते हो
यह बात सार्वभौम सत्य
ईश्वर मानव ह्रदय में बसते है
फिर। क्यों अपने हृद्यार्विन्द में
विराजमान ईश्वर को छलते हो
रहो प्रसन्नचित ले हास वदन पर
क्यों झूठा क्रंदन करते हो
वन्दन उस ईश्वर का कर लो
धरा पर धरा मानवरूप
कुछ तो अच्छे कर्म कर लो
कभी तो मुझ में ही
मोहन मुरलीधर के दरश कर लो
फिर ना रहेगा भेद मन में खेद
मोहन और मोहित में
बस करना हो तुम तो
केवल अपना करम कर लो
हां कृष्ण कन्हैया हूं मैं अच्छा है आपने
मेरे मोहन का रूप तो देखा मुझ में।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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