हसरत है मेरी

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- गज़ल/गीतिका

बिन तेरे अब तो गुजारा कहीं नहीं मेरा,
भरी महफ़िल में रहकर भी तन्हां रहूँगा।

तेरी यादों की खुशबू में है ऐसी तासीर
हर पल उसी अहसास से महका रहूँगा।

ताजे हैं दिल के जख्म और हरे भी हैं अभी
दर्द को प्यार तेरा मान के सहता रहूँगा।

यादों की बारिशें तो शोले ही बरसाती हैं उनकी भीगी सी तपन में तो मैं जलता रहूँगा।

ये मिलन है हमारा वो इसी जन्म का नहीं
जन्मों जन्मों तक मैं तुझे यूँ ही ढूंढता रहूँगा।

राहें मुहब्बत की माना बहुत पथरीली है
तुझको रब मान कर पूजा तेरी करता रहूँगा।

—-रंजना माथुर दिनांक 09/09/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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