उड़ो मत हवा में

Rita Yadav

रचनाकार- Rita Yadav

विधा- कविता

उड़ते हुए कब किसी ने,
सारी जिंदगी गुजारी है l
उड़ती है पतंग आसमां में,
पर घड़ी दो घड़ी के लिए l

होती है,एक दूजे में होड़,
कौन किसे काट जाए,
कटी पहले जो गिरी धरा पर,
काटी जो भी न बच पाई l

आसमां में उड़े पखेरू,
उड़ते फिरे खुले गगन में,
मस्त होकर विचरण करें जितना,
पर आसमां में ठौर न पाए l

दरख़्तों पर आकर ही,
मन में चैन वो पावे l
प्यास बुझावे ताल तलैया,
दाना खेत खलिहान में पावे l

पैर जमाए रखो जमीन पर,
विचार आसमान छू जाए,
सादगी का हाथ थाम लो,
कभी न मादकता आएl

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