हर सीख बेटियों को——–

dr. pratibha prakash

रचनाकार- dr. pratibha prakash

विधा- कविता

नहीं सीख बुरी कोई पर सब बेटियों के लिए क्यों है
नहीं रीत बुरी कोई फिर बेटियों के लिए क्यों है
विवेकपूर्ण परिधान हो है सही ये बात
पर नियंत्रित भी तो रहें दोषपूर्ण निगाह और जज्बात
है मासूमियत भली पर बेटियों के लिये बुरीक्यों है
नहीं सीख——-
क्या मुगल फिर से शासन हो गया फिर से परदा घूंघट चलन हो गया
नहीं अगर तो बेटियो के लिए मानसिकता वही क्यों है
नही सीख———-
क्या साडी में साक्षी का लड़ना सम्भव था
क्या दीपा का प्रदर्शन सलवार कमीज में सम्भव था
इतनी पहरेदारी कर्मो पे न होकर बेटियों पर क्यों है
नहीं सीख——–
गोपी से जाकर पूछो कैसे संधू ने खेला है
लपेट तिरंगे को जिस्म से कैसे चूमा है
समय की मांग पर भी नहीं आज़ादी बेटियों को क्यों है
नहीं सीख ——-
नहीं दौर अभी का ये याद दिलती हूँ
प.टी.उषा,अश्वनी,मल्लेश्वरी,मैरीकॉम गिनाती हूँ
नेहवाल और मिर्ज़ा को भी महत्ता न्यून सी ही क्यों है
नहीं सीख——-
कल्पना,सुनीता भी यदि परिधानों में बन्ध जाती
कतय साख तुम्हारी इतनी विश्व में बड़ पाती
इतनी सी समझ समय पर आती क्यों नहीं है
नहीं सीख——-
दृष्टि दोष करो ठीक समाज ये पुरुष प्रधान
सम्मान करो नारीत्व का इसमें छिपा तेरा अस्तित्व महान
सोचो प्रकृति की तुलना स्त्री की विद्वानों ने की क्यों है
नहीं सीख बुरी———

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dr. pratibha prakash
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Dr.pratibha d/ sri vedprakash D.o.b.8june 1977,aliganj,etah,u.p. M.A.geo.Socio. Ph.d. geography.पिता से काव्य रूचि विरासत में प्राप्त हुई ,बाद में हिन्दी प्रेम संस्कृति से लगाव समाजिक विकृतियों आधुनिक अंधानुकरण ने साहित्य की और प्रेरित किया ।उस सर्वोच्च शक्ति जसे ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु गॉड कहा गया है की कृपा से आध्यात्मिक शिक्षा के प्रशिक्षण केंद्र में प्राप्त ज्ञान सत्य और स्वयं को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ।

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6 comments
  1. *Some Text Deleted by Moderator* बेटियाँ किसी मामले में गलत हो ही नहीं सकती एवम् पुरुष तो पैदा ही इलज़ाम और गलतियों के लिए हुआ है एवम् सभी कवि एवम् कवयित्रियाँ इस मुद्दे पर ही लिखेंगी। एक बात याद रखना लड़कियो को शिक्षा ने एडवांस होने के लिए बोला था न की अश्लील होने के लिए। ये बॉलीवुड ने सभी को इतना ब्रॉड माइंडेड बना दिया है कि बस पूछिये मत कुछ हमारे देश का सिलेबस इतना किताबी है उसे पढ़ कर वैसे ही सीखने के द्वार बन्द हो जाते हैं ।

    Moderator Comment- कृपया साहित्यकार पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी न करें।

    • क्षमा अनुज किसी भी संतृप्त मानसिकता के लिए कदापि उत्तर देना उचित नहीं होता।

  2. समाज में निकल कर तो देखें दीदी जी , लड़कियां एवम् औरतें समाज में क्या गुल खिला रही हैं। लड़को से शारीरिक सम्बन्ध की अपील कर बाद में उन्हें ही बदनाम कर रही है एवं उनका संवेदनशील पहनावा कैसे सास ससुर को शर्मिंदा कर रहा है। 6 इंच का टॉप और 6 इंच की निक्कर खिलाड़ी पहने तो आरामदायक कह सकते हैं दीदी यदि हर नारी पहने तो ये कहना गलत न होगा दीदी जी कि आदि मानव का समय आ गया आप ये सोचते होंगे कि आपका ये भाई लड़कियो एवं औरतों के प्रति कड़वा क्यों लिखता है किसकी कौन कितनी इज्जत करता है ये मैं और मेरा ईश्वर जानते हैं परन्तु यदि देश में सब आदमी एवं औरतें इस मुद्दे को लेकर गूंगे होंगे तो किसी को तो लिखना ही पड़ेगा । बस उनमें प्रभु ने इस कार्य के लिए मुझे चुना है। *Some Text Deleted by Moderator*

    Moderator Comment- कृपया साहित्यकार पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी न करें।

  3. वाह्ह्ह्ह्ह्ह् प्रतिभा जी बहुत सुन्दर रचना है । हार्दिक बधाई आपको ।

  4. बहुत सुन्दर कहा आपने विवेकपूर्ण परिधान हो पर दोषपूर्ण निगाह और जज्बात भी नियंत्रण में रहें । सोच अच्छी होनी चहिये । क्योंकि ये समाज पुरुष और नारी दोनों से ही मिलकर बनता है तो जरुरी है कि दोनों में ही अच्छे संस्कार हों ।

    • जी अर्चना जी बहुत बहुत शुक्रिया
      ये भारत भू की संस्कृति है ये दर्शन है कि हम वात्सायन को मह्रिषी वात्सायन कहते है यदि मनुष्य प्रकृति प्रदत्त गुणों को विकार बनाये स्त्री हो या पुरुष सामाजिक अपराधी और पशु श्रेणी का है।