हर तमन्ना अज़ाब लगती है

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गीत

जिन्दगी अब खराब लगती है
बिन तुम्हारे अज़ाब लगती है

करके सोलह सिंगार आए तो
परी वो लाज़वाब लगती है

चाल मस्ती की चाँद सा चेहरा
चश्मे जानाँ शराब लगती है

टूट कर दिल ने ये कहा अब तो
हर तमन्ना —— अज़ाब लगती है

गौर से देख उसको बोतल सी
बंद कुह्ना शराब लगती है

जब भी देखा उसे मुहब्बत से
मेरा खाना ख़राब लगती है

बात हाँ की कहाँ है "प्रीतम" की
तेरी न लाज़वाब लगती है

🌹🌹🌹 प्रीतम राठौर 🌺🌺🌺
🌺🌺श्रावस्ती (उ० प्र०)🌺🌺
🌹🌹🌹🌹

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।
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