हरे रामा , हरे कृष्णा

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- कविता

उम्र ज्यों-ज्यों बढ़ रही है।
वुद्धि-सी कुछ आ रही है।
यूँ लगे जैसे कि- मुरली ,
कान में कुछ गा रही है ।
कर्म-पथ की राह कान्हा ,
मन को मेरे भा रही है ।
मौत भी प्रिय लगती अब तो,
ज़िन्द़गी भी छा रही है।
ओ ! मेरे हमदम व साथी ,
मेरे संग-संग गुनगनाओ ,
हरे रामा , हरे कृष्णा ।
मेरे संग-संग तुम भी गाओ,
हरे रामा, हरे कृष्णा।
हरे रामा , हरे कृष्णा ।

Views 579
Sponsored
Author
ईश्वर दयाल गोस्वामी
Posts 69
Total Views 30.4k
-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
6 comments
  1. रामनाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली-गली।
    ले लो कोई हर्ज का प्याला शोर मचाऊँ गली-गली।

  2. बहुत शानदार……आपकी रचनाएं मेरे लिए प्रेरणा का कार्य करती है।।धन्यवाद।।