-हरिनाम

रणजीत सिंह रणदेव चारण

रचनाकार- रणजीत सिंह रणदेव चारण

विधा- कुण्डलिया

हरिराम जपले प्राणी ; जन्म यो सुधर जाय ।
केऊ मन हित सोच के ; बचे ना कर्म सिवाय ।।
बचे ना कर्म सिवाय ; जद न चले कर्म रामा ।
ऐसा नाम अमोल ; भजहुं मनवा बिन धामा ।।
आभा उर हरिें जोड ; नित वंदनाकारी हैं ।
केह रणदेव मनुज ; कर्मा प्रबल धारी हैं।।

रणजीत सिंह "रणदेव" चारण
मुण्डकोशियां
7300174627

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रणजीत सिंह रणदेव चारण
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रणजीत सिंह " रणदेव" चारण गांव - मुण्डकोशियां, तहसिल - आमेट (राजसमंद) राज. - 7300174627 (व्हाटसप न.) मैं एक नव रचनाकार हूँ और अपनी भावोंकी लेखनी में प्रयासरत हूँ। लगभग इस पिडीया पर दी गई सभी विधाओं पर लिख सकता हूँ। आप सभी मेरी प्रत्येक रचना को पढकर अपनी टिप्पणी देंवे और कोई गलती हो तो सुधार भी बतावें। मेरी आशा मेरा हौंसला। धन्यवाद

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