हरपल दिल में चाह यही है, लौटे बचपन फिर इक बार

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

रचनाकार- लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

विधा- कविता

याद आ रही माँ की लोरी, और मुझे वो माँ का प्यार
बहुत सुखद थे बचपन के दिन, माँ का आँचल ही संसार।

दूध रोटियाँ लगती प्यारी, ज्यों हो स्वाद भरे पकवान
जो चाहा तब मिल जाता था, माँ लगती थी इक भगवान।

नहीं थे सारे खेल खिलौने, फिर भी ख़ुश थे सारे यार
गुड्डे-गुड़िया, गिल्ली-डंडा, खुशियाँ मिलती अपरम्पार।

किसी बात की नहीं थी चिंता, नहीं हृदय में बड़े सवाल
छोटी छोटी खुशियाँ थीं पर, जीवन लगता था खुशहाल।

ना जाने क्यों बड़े हुए हम, कहाँ खो गए दिन वो चार
हरपल दिल में चाह यही है, लौटे बचपन फिर इक बार।

लोधी डॉ. आशा 'अदिति' (भोपाल)

Views 67
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
Posts 66
Total Views 9.8k
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia