हम बच्चे मस्त कलंदर

डी. के. निवातिया

रचनाकार- डी. के. निवातिया

विधा- कविता

हम बच्चे मस्त कलंदर

एक मुट्ठी में सूरज का गोला
एक में लेकर चाँद सलोना
खेलने निकले हम अम्बर पे
करके सितारों का बिछोना !
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

बिना पंख के हवा में उड़ते
अड़यल तूफानों से लड़ते
बादलो के बिस्तर करके
आता है हमको सोना !
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

बिजलियों की चकाचौंध में
जश्न मनाये अपनी मौज में
बगल में छुपाकर पर्वतो को
मस्ती में खेले पाना-खोना !!
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

समुन्दर भरा अपनी आगोश
लहरो से प्रबल है अपना जोश
बारिश की बूंदो से मोती बना दे
रेत से बनाये अपना घरोंदा !!
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

दिन अपनी आँखों में रहता
रात का जुगनू रोता रहता
शबनम से दीपक जला कर
चमका दे धरती का कोना कोना
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

दरख्तों को भर भुजाओ में
घूम जाये दशो दिशाओ में
पुष्पलता को कंठ सजा के
गुनगुनाये साज सलोना !!
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

हम इस जग के पालनहार
हम ईश्वर का साश्वत रूप है
आने वाले कल ले मुट्ठी में
घूमते है हम जग का कोना कोना
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

!

डी के निवातिया

Sponsored
Views 219
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
डी. के. निवातिया
Posts 172
Total Views 27.4k
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia