हम तड़पते रहे

Govind Kurmi

रचनाकार- Govind Kurmi

विधा- कव्वाली

यूँ चुराके नजर
वो गये जब मुकर
वो तो हंसते रहे, हम तड़पते रहे
💔💔💔💔💔💔💔💔💔

आंखें ये नम हुई
सांसे भी कम हुई
पर तेरी याद में हम सुलगते रहे
वो तो हंसते रहे हम तड़पते रहे
💔💔💔💔💔💔💔💔💔

जो यूँ ठुकरा गये बीच मझधार पर
शायद हमसे खफा है वो तकरार पर

यूँ तरस खा के वो मेरे हालात पर
वो खुदा भी था रोया मेरे जज्बात पर
💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔

देख गम को मेरे वो गरजते रहे
हम जो रोये तो बादल बरसते रहे
💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔

यूँ चुराके नजर
वो गये जब मुकर
वो तो हंसते रहे, हम तड़पते रहे
💔💔💔💔💔💔💔💔💔

तेरी राह देखेंगे
हर दर्द सह लेंगे
फिर ना कहना कि क्यों राह तकते रहे
💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔

यूँ चुराके नजर
वो गये जब मुकर
वो तो हंसते रहे, हम तड़पते रहे
💔💔💔💔💔💔💔💔💔💔

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Govind Kurmi
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गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।

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