हम ग़रीबों से भला अब आपको क्या काम है

Salib Chandiyanvi

रचनाकार- Salib Chandiyanvi

विधा- गज़ल/गीतिका

आपको जब ताकने का आँख पर इलज़ाम है
ये बताऐं दिल हमारा किस लिये बदनाम है
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आपने तो दिल को चकना चूर कर के रख दिया
हम ग़रीबों से भला अब आपको क्या काम है
…………..
ज़िन्दगी और मौत दोनों लाज़िमो मलज़ूम हैं
जिन्दगी है इब्तदा तो मौत इक अंजाम है
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चन्द सिक्कों मे मिलेगी आपको इंसानियत
दिल का क्या है दिल तो साहिब कोडियों के दाम है
……………
शुक्र है हमसे मियाँ मिलने कोई आता नहीं
ज़िन्दगी में आज-कल आराम ही आराम है
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मंज़िलों से कह दो सालिब ख़ुद ही आ कर ढूँढ लें
मेरी किस्मत मुबतिलाऐ गर्दििशे अय्याम है

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Salib Chandiyanvi
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मेरा नाम मुहम्मद आरिफ़ ख़ां हैं मैं जिला बुलन्दशहर के ग्राम चन्दियाना का रहने वाला हूं जाॅब के सिलसिले में भटकता हुआ हापुड आ गया और यहीं का होकर रह गया! सही सही याद नहीं पर 18/20की आयु से शायरी कर रहा हूँ ! उस्ताद तालिब मुशीरी साहब का शाग्रिद हूँ पर ज्यादा तर मैने फेस बुक से सीखा जिसमें मनोज बेताब साहब, कुंवर कुसुमेश साहब, मुख्तार तिलहरी साहब का बहुत बडा हाथ है !
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