हम खामोश है मगर तुम्हें भूल न पाते हैं

विनोद कुमार दवे

रचनाकार- विनोद कुमार दवे

विधा- गज़ल/गीतिका

हम खामोश है मगर तुम्हें भूल न पाते हैं
दिल से सदा देकर तुम्हीं को तो बुलाते हैं।
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और तो क्या करें दुनिया के रिवाजों का,
आओ मेरे यार इनकी होली जलाते है।
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इन दीवारों को कभी तो गिरना है ही,
हम दोनों मिलकर ये दूरी मिटाते है।
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नफ़रत के आगोश में जी लिए जिन्हें जीना था,
हम तो खुशबु-ए-इश्क़ की हवा चलाते है।
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मत रहो उदास इन हसीन लम्हों के दरमियान
थोड़ा तुम मुस्करा दो थोड़ा हम मुस्कराते है।

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विनोद कुमार दवे
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परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

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