हम एक देश के वासी है ये हिन्दुस्ता हमारा है

Bhupendra Rawat

रचनाकार- Bhupendra Rawat

विधा- कविता

हम एक देश के वासी है
ये हिन्दुस्ता हमारा है
नाजाने कितने वीरों ने
फंदे को गले में उतारा है
सबने ही कुर्बानी दी
धर्म का ना कोई खेल किया
हिन्दुस्ता के वीरों ने खुद को
देश के लिए भेट किया
राजनीति के लोगों ने
देश को धर्मो में बाँट दिया,
जात-पात का खेल खिला कर
कितनो को शूली में टांग दिया |
सब धर्मों ने मिलकर ही हिन्दुस्ता को
आज़ाद करवाया था |
नही किया था भेद-भाव
एक थाली में मिलकर खाया था |
देश के वासीयों ने एकता दिखाई थी
फिरंगी को मार भगाया सबको आज़ादी दिलाई थी |
चंद स्वार्थी लोगों ने देश अपना बना डाला
हिन्दुस्ता को बाँट कर हिन्दू मुस्लिम बना डाला
देश के वीर जवानो की कुर्बानी वो भूल गए
हो गए वो सत्ता लोभी देश को वो लूट गए |
आँखे बंद कर ली है सबने मूक-बधिर वो गए
देश की जनता को मूर्ख बनाकर जीत कर वो सो गए |
पांच साल के शासन में कितना ही कमा डाला
बेशर्मो ने तो देश का व्यपार भी कर डाला
जिस थाली में खाया है उसमे ही छेद किया
चंद पैसों के खातिर देश को बेच दिया
मर रही भूखी जनता उनका भी हक छीन लिया
भूपेंद्र रावत
4/09/2017

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Bhupendra Rawat
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M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।

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