हम उनके होंठों पर बिखरी मुस्कान देखते रहे

Shanky Bhatia

रचनाकार- Shanky Bhatia

विधा- मुक्तक

वो हम पर मज़ाक के वार करते रहे, हम ख़ामोशी से सब सहते रहे,
वो अपनी जीत समझते रहे, हम उनके होठों पर बिखरी मुस्कान देखते रहे।

————–शैंकी भाटिया
अगस्त 24, 2016

इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Shanky Bhatia
Posts 52
Total Views 538

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia