हम अपनी बात बताते है।

Vindhya Prakash Mishra

रचनाकार- Vindhya Prakash Mishra

विधा- कविता

हम अपनी बात बताते है
अपने उसूल पर चलते है
निंदा की परवाह बिना
अपने ढंग से हम जीते है
सहते है कष्ट आह बिना
हम अध्येता है नित शोध करे
सच कहते न घबराते है
हम अपनी बात बताते है
पैसो की परवाह नही
पद प्रसिद्धि की कोई चाह नही
कोई मेरे बारे मे जो कहता
कम जाना है थाह नही
सब जिस रास्ते मे चलते है
वैसी है मेरी राह नही
प्रसंशा से प्रसंन्न न होते
चलते नित न घबराते है
हम अपनी बात बताते है
कोई मुझको अध्यापक जाने
कोई कवि रूप पहचाने
कोई कमजोर कहा करते
कोई कोई निर्धन जाने
कोई अज्ञानी मान रहा
कोई गुरू सा सम्मान दे रहा
मै क्या हूं कम ही जताते है
हम अपनी बात बताते है
कभी बात चलती है जन मे
रहता अहम् जिनके मन मे
छोटा कह देते है छन मे
नही सामना हुआ हमारा
कहां पराजित किए है रन मे
पर मुझसे बडा जताते है
हम अपनी बात बताते है
सज्जनता सादगी सच्चाई
सदा मुझे जीवनभर भाई
संकोची हूं कुछ बात करू
अपने को नही दर्शाते है।
हम अपनी बात बताते है
कितने संघर्ष सहे हमने
कितनी असफलताएं पाई
कितनी आलोचना सहे
कितनी मैने ठोकर खाई
पर चुप रहते सह जाते है
नही कभी बतलाते है
आज अपनी बात बताते है।
कम शब्दो मे मैने कह दी
अपने बारे मे बात
फिर अवसर पर करेगे।
अपने मन की बात
विन्ध्यप्रकाश मिश्र नरई संग्रामगढ प्रतापगढ

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Vindhya Prakash Mishra
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