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Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

आक्सीजन की कमी से दम तोड़ते मासूम
बाढ़ों के सैलाब में बहते बेबस नर नारी
ट्रेन हादसों में ढेर होती लाशें
शायद हैं सारे महज तमाशे
विद्यालयों में बालकों की निर्मम हत्याएँ
ढोंगियों द्वारा शोषित दुखित अबलाएं
किसी को नजर क्यों नहीं आ रहे हैं ?
क्या दोष था इन मासूमों का ?
क्यों सारे बड़बोले नेता चुप्पी लगा रहे हैं ?
सत्ता में जगह बनाने में
चुनाव में वोट कमाने में
हरदम जिनका दारोमदार है
जिसे जनता से न कोई सरोकार है।
जिन्हें चुना हमने
अपनी साज संभाल के लिए।
आज उन्हें फुर्सत तक नहीं
पूछने को लोगों के
जीने – मरने के हाल के लिए।
उनकी यह बेरुखी यह रवैया
हमको नहीं स्वीकार है।

—–रंजना माथुर दिनांक 09/09/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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