हमसफ़र

Manju Bansal

रचनाकार- Manju Bansal

विधा- कविता

जीवन की राहें अधूरी हैं हमसफ़र बिना
जीवन बिल्कुल सूना है हमसफ़र बिना
हमसफ़र हो ऐसा जो हमराज़ बन जाये
इस भरी दुनिया में सहारा बन जाये ।।

संघर्ष के दौर में क़दम मिलाकर चले
धूप गर पड़े तो ठंडी छाँव वो करे
बारिश की रिमझिम में प्यार के दो शब्द कहे
हमसफ़र हो ऐसा जो ज़िंदगी सँवार दे ।।

सुख- दु:ख जो हँसते- हँसते संग में सहे
अंधेरे दूर कर रोशनी की किरण बन जाये
हमसफ़र वो जिससे जीवन खूबसूरत बन जाये
जीवन का हर एक लम्हा यादगार बन जाये ।।

लंबा सफ़र ज़िंदगी का यूँ ही कटता नहीं
तन्हा हो तो ये दिल कहीं लगता नहीं
हमसफ़र जो जीवन में हर रंग बिखेर दे
विश्वास की डोर जो कभी टूटने न दे ।।

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