:::#::: हमने यह सीखा फूलों से :::#:::

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- गीत

फूल-फूल तुम कितने प्यारे,
देख तुम्हें मन होता पुलकित।
रंग तुम्हारे हैं चटकीले,
सबको करते हैं प्रफुल्लित।
मुग्ध मगन खुश कर देती,
मधुर तुम्हारी गंध सुवासित।
उदास और दुखी मन को भी,
तुम कर देते हो प्रसन्नचित्त।
कांटों के संग-संग रहकर भी,
तुम झूमते रहते आनंदित।
हर रूप हर आकार तुम्हारा,
देख-देख मन है रोमांचित।
तुम देते हमको यह सीख,
करते हमें इस बात से शिक्षित।
सुख या दुख कोई भी हाल हो,
रहो मेरी तरह मुदित उल्लासित।

—रंजना माथुर दिनांक 23/09/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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