****हनुमान चिन्तन=श्रेष्ठ परिणाम****

Abhishek Parashar

रचनाकार- Abhishek Parashar

विधा- मुक्तक

स्वर्ण जैसी कान्ति लिए हैं मेरे हनुमान,
मन में विशाल रूप धरि के तो देखिए।।1।।
अंजनी के लाल के गाल हैं जो लाल-लाल,
उदित रवि के रंग सूँ मिलान कर देखिए ।।2।।
भृकुटी तनी-तनी सी सोहत मुखार विन्द,
राम रस की तरंग हिडोर मान देखिए ।।3।।
सुन्दर सी ग्रीवा, बसी जो कपीश अंग,
सीता राम रंग में रंगाय जो हैं देखिए ।।4।।
उर है विशाल सीता राम जी की झाँकी लिए,
बार-बार मन में हर्षाय रूप देखिए।।5।।
सुदृढ़ है बाहु, विशाल स्कन्ध अंग लगे,
पराक्रम की सीमा मन लाँघ के तो देखिए।।6।।
नख शिख रूप है अनूप, इन्द्र भी लजावते हैं,
बार बार ध्याइये, नीक परिणाम देखिए।।7।।

(मेरा लिखना मेरा इतराना ही होगा, परन्तु हनुमान जी लिखबाते हैं और मैं लिख देता हूँ, तो इसमें बुरा क्या है- प्रथम दृष्टया में अवगत करा दूँ-मैं कवि नहीं हूँ-ज्यादा विवेचना न करें)
##अभिषेक पाराशर##

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Abhishek Parashar
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शिक्षा-स्नातकोत्तर (इतिहास), सिस्टम मैनेजर कार्यालय-प्रवर अधीक्षक डाकघर मथुरा मण्डल, मथुरा, हनुमत सिद्ध परम पूज्य गुरुदेव की कृपा से कविता करना आ गया, इसमें कुछ भी विशेष नहीं, क्यों कि सिद्धों के संग से ऐसी सामान्य गुण विकसित हो जाते है।आदर्श वाक्य है- "स्वे स्वे कर्मण्यभिरत: संसिद्धिं लभते नर:","तेरे थपे उथपे न महेश, थपे तिनकों जे घर घाले तेरे निवाजे गरीब निवाज़, विराजत वैरिन के उर साले"

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