हनुमान कूद

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

रचनाकार- डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

विधा- कविता

दुश्मन को देखकर
भागने से पहले
हिरण एक लम्बी छलांग क्यों लगाती है ?
इसलिए, हाँ शायद इसलिए,
दुश्मन को आभास हो जाय
शावक ने उसे देख लिया है
और वह
व्यर्थ की दौड़ से बच जाय.
मनुज !
तुम क्यों छलांग लगा रहे हो ?
इसलिए, हाँ शायद इसलिए,
तुम्हे भारी ओहदा मिल जाय
एक ही छलांग में
और तुम्हे व्यर्थ मेहनत न करनी पड़े
पर यह हनुमान कूद होगी
और तुम खड़े हो जावोगे
बेरोजगारी की लम्बी कतार में.
शिखर पर पहुंचने के लिए
एक छलांग काफी नहीं
कदम- दर- कदम
बढ़ाते चलो
और एक दिन
शिखर पर होंगे
तुम्हारे कदम .

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डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
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देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर' काव्य संग्रह मित्र प्रकाशन, कोलकाता के सहयोग से प्रकाशित। सामान्य ज्ञान दिग्दर्शन, दिल्ली : सम्पूर्ण अध्ययन, वेस्ट बंगाल : एट ए ग्लांस जैसी बहुचर्चित कृतियां 'उपकार प्रकाशन' से प्रकाशित। प्रत्येक चार माह पर समसामयिक सीरीज का लगातार प्रकाशन, 'अंचल भारती' पत्रिका का सह-सम्पादन ।मो9450017326

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