स्वरचित दोहे

Alka S.Lalit

रचनाकार- Alka S.Lalit

विधा- दोहे

स्वरचित दोहे
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छोटे मुँह की बात भी,ऊँची राह सुझाय ।
सीख कहीं से भी मिले, सीखो ध्यान लगाय ।।

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औरन को अपना कहें , सुनते उनकी बात
अपनों की सुध है नहीं उनसे करते घात)

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ऐसा नाम कमाइए, मन के खोले द्धार
अपनों की सुध लीजिये, बढे प्रेम व्यव्हार

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खुशियों की खामोशियां , खा जाती सुख चैन।
यादें ना हो साथ तो ,दिन बीते ना रैन ।।

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Alka S.Lalit
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