दो पल की मौत

Govind Kurmi

रचनाकार- Govind Kurmi

विधा- कविता

एक ठोकर सी लगी दिल में सांसें ही थम गईं ।

झटका था इस कदर की रूह तक सहम गई ।

चारों ओर सन्नाटा था हर ओर अंधेरा था ।

ये कहां पहुंच गया में मुझको सायों ने घेरा था ।

थोड़ी ही देर में मुझको कुछ आवाज सुनाई दी ।

घबराहट तब कम हुई जब भैंस आती दिखाई दी ।

जो कुछ भी में देख रहा वो पहले से अनदेखा था ।

हंसी आ गई घबराई सी जब भैंस पर दूल्हा देखा था ।

कुछ ढोल पीट रहे थे कुछ शंखनाद करने लगे ।

कुछ समझ ना आया क्यों सब उससे फरियाद करने लगे ।

दूल्हे के एक इशारे पर रोशनी छाई चारों ओर ।

होश उड़ गये हमारे देखकर हुआ में भय विभोर ।

पकड़े थे जो मुझको उन मुस्तन्डों का रंग काला था ।

घर्णित मुंह से देखा उनको बमुश्किल होश संभाला था ।

कौन था वो भैंसे पर मसखरा जिसका लिवाज था ।

घूर रहा था मुझको ऐसे जैसे हमसे नाराज था ।

बारी बारी से सब उसको कुछ सुनाने लगे ।

कुछ देर से वो मेरा परिचय उससे कराने लगे ।

बातें उनकी सुनकर हम भी कुछ घबराने लगे ।

ना मिला जिनसे कभी वो हमारी कहानी सुनाने लगे ।

एक डाकिये ने हमारी दास्तान उसको बतलाई ।

जो हम भी भूल चुके थे वो बातें याद दिलाई ।

वो बोला क्यों लाये इसे ये मौत से काफी दूर है ।

गुनाह नहीं कोई इसका बस यह तो इश्क में चूर है ।

ले जाओ वापिस इसे अभी बहुत काम करना है ।

शायरों में अपना नाम और आशिक दिलों को गुलाम करना है ।

शायर ऐ हिंद और बहुत कुछ इसे कहा जायेगा ।

धीरे-धीरे ही सही ये हर दिल पर छा जायेगा ।

उसके एक इशारे पर हमको वहीं से फेंका ।

हाथ पैर सब सलामत थे जब उठकर हमने देखा ।

सलामत होकर भी में इसकदर बेवजह चिल्लाया ।

होश तो आया तब जब मां ने कान के नीचे बजाया ।

रोते हुये उन्होंने हमको सीने से लगाया ।

ना करना फिर ऐसा मजाक बड़े प्यार से समझाया ।

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Govind Kurmi
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गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।

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