स्पर्श/संस्पर्श

प्रदीप कुमार दाश

रचनाकार- प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

विधा- हाइकु

स्पर्श/संस्पर्श
01. तेरी छुवन
मन बगर गया
मानो बसंत ।
☆☆☆
02.हवा बहकी
सुमनों को छू कर
महका गयी ।
☆☆☆
03.मोम का तन
बत्ती की छुवन से
हुआ गलन ।
☆☆☆
04.माटी का लौंदा
कुम्हार का स्पर्श रे !
कलश पक्का ।
☆☆☆
05. वाह्ह. इन्सान
धरा से उठ कर
छू लिया चाँद ।
☆☆☆
□ प्रदीप कुमार दाश "दीपक"
मो.नं. 7828104111

Sponsored
Views 7
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
प्रदीप कुमार दाश
Posts 29
Total Views 469
हाइकुकार : ♢ प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ♢ सम्प्रति : हिन्दी व्याख्याता 13 कृतियाँ : -- मइनसे के पीरा, हाइकु चतुष्क, संवेदनाओं के पदचिह्न, रुढ़ियों का आकाश, हाइकु वाटिका, हाइकु सप्तक, हाइकु मञ्जूषा, झाँकता चाँद, प्रकृति की गोद में, ताँका की महक, कस्तूरी की तलाश, छत्तीसगढ़ के हाइकुकार, वंदेमातरम् ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia