सोच

Kokila Agarwal

रचनाकार- Kokila Agarwal

विधा- कविता

कभी कभी सोचती हूं
भगवान सुनता है क्या
बहुत ही छोटी
होती है ये सोच
सोच में बहे आंसू भी
यूं ही कोई उंगली
क्यूं थाम लेता है
क्यूं संग संग किसी के
आंसू बहते हैं
क्यूं कोई तुम्हारी
फ़िक्र करता है
क्यूं कोई यूं ही
सर पर हाथ रख देता है
क्यूं कोई तुम्हे
तुमसे ज्यादा जान लेता है
यूं ही तो नहीं न
कहीं ये ही तो
भगवान नहीं होता ??

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Kokila Agarwal
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