सोच लो फिर दुआ न पाओगे

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

ग़ज़ल
—-::::—
बह्र -👇
बह्रे ख़फीफ़ मुसद्दस मख़बून
वज़्न 👇
212 212 1222
💟💟

दिल लगा कर वफा न पाओगे
दर्दे दिल की दवा न पाओगे
💞💞
मिल रहे अश्क अब मुहब्बत में
इश्क में मुस्कुरा—— न पाओगे
💟💟
छोड़ दी—— बंदगी बुजुर्गों की
सोच लो फिर —-दुआ न पाओगे
💗💗
जख्म खाकर –भी चुप रहोगे पर
दाग दिल के—- दिखा न पाओगे
💟💟
आतिशे इश्क लग गई तो फिर
तुम कभी भी —बुझा न पाओगे
💗💗

राज इक बार —खुल गया हो तो
बात फिर तुम —–बना न पाओगे
💟💟
इन हसीनों की —-ऐसी फितरत है
इश्क का कुछ —-सिला न पाओगे
💗💗
पीठ में घोंपते ————–छुरा हैं ये
इनसे दामन ———बचा न पाओगे
💟💟
शबे फुर्क़त——— तुम्हे रुलाएगी
चश्म नम फिर —–सुखा न पाओगे
💟💟
जिंदगी तो ———-भटक कर बीते
उम्र भर ————-रास्ता न पाओगे
💗💗
गर नजर से पिला तो पी लूंगा
मयक़दे की पिला न पाओगे
💗💗
मौत लाजिम है आएगी "प्रीतम"
इससे बच कर के जा न पाओगे
*****
प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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