सैनिक की पुकार

आशीष बहल

रचनाकार- आशीष बहल

विधा- कविता

सैनिक की पुकार

सुनो सैनिक की वीरता सुनाने आया हूँ, दर्द की मैं इक गाथा कहने आया हूँ। लहू से लथपथ एक सैनिक जब भारत माता को पुकारे वो करुणा बतलाने आया हूँ वीर सैनिक कहता है……
माँ, माँ दर्द से बेहाल मैं बेजान सा हुआ जाता हूँ भर ले अपने आँचल में, मैं लड़खड़ा सा जाता हूँ। चीर कर देह मेरी, दुश्मन ने हैवानियत का वो खेल खेला है क्या बताऊँ माँ,
बन हिमालय सरहद पर हर घाव मैंने झेला है, हिमाकत दुश्मन की जो मुझे ललकारा है, मैंने घर में घुस कर उसको मारा है। हे माँ मैंने दिन रात अपने लहू से तुझे संवारा है।

थका नहीं,हारा नहीं हर पल गुणगान माँ भारती का गाया है, कमाए होंगे किसी ने नोट ,वोट। मैंने तो भारत माँ के आगे ही शीश झुकाया है।

ले ले छांव में अपनी, अपने आँचल में मुझको छिपा लेना, टूटती इस देह को अपनी ममता से भर देना, बन सैनिक हर बार मैं कुर्बान माँ तुझ पर हो जाऊं, बस रोते बिलखते माँ- बाप को तू संभाल लेना।
खड़ी जो हो मेरे इंतजार में प्राण प्यारी चुपके से उसके कान में नाम मेरा ले आना। ढूंढती बहन की आँखों में मेरी तस्वीर छोड़ आना। फौलाद से मेरे भाई के कंधों को तुम साहला आना। पूछे जो कोई पता मेरा प्यारा सा तिरंगा लहरा आना।
बस फरियाद सैनिक की हर भारतवासी सुन लेना, माँ के दामन को दागदार न होने देना,
कहता है 'आशीष' वास्ता सैनिक का खुदगर्ज दुनिया में कभी भारत माँ को न बेच देना, खुदगर्ज दुनिया में कभी भारत माँ को न बेच देना।
आशीष बहल चुवाड़ी जिला चम्बा

Views 57
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
आशीष बहल
Posts 5
Total Views 439
अध्यापक, कवि, लेखक व विभिन्न समाचार पत्रों में स्तम्भ लेखन

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia