सुबह सुहानी

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

किताबों मे खो जायेगी
इक दिन मेरी कहानी
घड़ियों की रफ्तार मे
खो जायेगी मेरी जवानी ।

क्यूं न फिर मै
अरमानो को जाम पिला दं
जब तक है ये रात रूहानी
ख्वाबों को मै पंख लगा दूं
जब तक है ये सुबह सुहानी ।

यादों को मै अमर बना दूं
जाने कब हो मेरी रवानी
टुकड़े टुकड़े कर दूं
पैरों की जंजीर पुरानी ।

तूफानो को मै शान्त करा दूं
जब तक है मद मस्त जवानी
पहाड़ों को मै राई बना दूं
चाहे मिट जाये मेरी निशानी ।।

राज विग

Views 85
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Raj Vig
Posts 34
Total Views 1.8k

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia