सुबह सुहानी

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

किताबों मे खो जायेगी
इक दिन मेरी कहानी
घड़ियों की रफ्तार मे
खो जायेगी मेरी जवानी ।

क्यूं न फिर मै
अरमानो को जाम पिला दं
जब तक है ये रात रूहानी
ख्वाबों को मै पंख लगा दूं
जब तक है ये सुबह सुहानी ।

यादों को मै अमर बना दूं
जाने कब हो मेरी रवानी
टुकड़े टुकड़े कर दूं
पैरों की जंजीर पुरानी ।

तूफानो को मै शान्त करा दूं
जब तक है मद मस्त जवानी
पहाड़ों को मै राई बना दूं
चाहे मिट जाये मेरी निशानी ।।

राज विग

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