गुलाबी सर्दियों की दस्तक

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

🌹🌹🌹🌹
सुबह की धूप
आज कल अच्छी लगने लगी है।
शाम की हवाएँ
फिर से तन को सिहराने लगी हैं।

गुलाबी सर्दियाँ
फिर से दस्तक देने लगी हैं।
हरी-हरी घास पर
ओस की शफ्फाक बूँदें दिखने लगी हैं।

गुलाबों की महक
फिजाओं में घुलने लगी हैं।
सफेद नारंगी हरसिंगार
हरी-हरी घास पर बिछने लगी हैं।

खेत मे सरसों की
पीले-पीले फूल इठलाने लगी है।
धुंध की चादर ओढ
धरती आकाश गले मिलने लगी है।

भवरों और तितलियाँ
बागों में फूलों पर इतराने लगी है।
पंक्षियों की कलरव
मधुर-मधुर लगने लगी है।

नवीन रूप धरा की
श्वेत सुगंधित लगने लगी है।
मौसम के साथ
उपवन भी नव रूप धरने लगी है।
🌹🌹🌹🌹—लक्ष्मी सिंह

Views 151
Sponsored
Author
लक्ष्मी सिंह
Posts 144
Total Views 44.1k
MA B Ed (sanskrit) please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia