सुनहरे पल

Brijpal Singh

रचनाकार- Brijpal Singh

विधा- कविता

वो हर लम्हा
सुनहरा होता है
जो अनुरूप हमारे
साथ खड़ा होता है
न रंग, न रूप
न ही भेद कोई
समय भी कोई
ख़ास नहीं होता
कभी चाहकर
भी नहीं मिलता
कभी बिन चाहे
मिल जाता है
यद्यपि सोचें और
करें मनन तो
हर पल सुनहरा
ही होता है
मानों तो है
न मानों तो नहीं
कभी जब डूबें
हो दूर गहराई में कहीं
उस क्षीण पल में भी
खुशियाँ अपार होती है
समझ कर अगर
कर लो पार तो
और खुशियाँ हज़ार् होती हैं
पल-पल को
हर पल से जियो
जिस जहाँ हैं हम अभी
तरसते हैं कई
यहाँ तक आने को
और कई तो
पहुँचते तक नहीं
इसीलिये जियो दिल से
हर लम्हें को
शायद यहीं
सुनहरा बन जाए !!

– —————बृजपाल सिंह !

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Brijpal Singh
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मैं Brijpal Singh (Brij), मूलत: पौडी गढवाल उत्तराखंड से वास्ता रखता हूँ !! मैं नहीं जानता क्या कलम और क्या लेखन! अपितु लिखने का शौक है . शेर, कवितायें, व्यंग, ग़ज़ल,लेख,कहानी, एवं सामाजिक मुद्दों पर भी लिखता रहता हूँ तज़ुर्बा हो रहा है कोशिश भी जारी है !!

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