सुख की रोटी दाल

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

आएगा क्या वाकई ,… ऐसा कोई साल !
जनता को जिसमे मिले,सुख की रोटी दाल !!

बीते सत्तर साल से, …ठोक रहे हैं ताल !
मिली कहाँ सबको मगर,सुख की रोटी दाल!!

नजरों मे मेरी मुझे, .लगे वही खुशहाल!
खाये दोनो वक्त जो,सुख की रोटी दाल!!

चाहे धन्ना सेठ हो,…..चाहे हो कंगाल !
मिले किसे इस दौर मे सुख की रोटी दाल!!

सरकारें आई गई, .अब भी खडा सवाल !
मिली कहाँ आवाम को,सुख की रोटी दाल !!

भौतिक सुख की चाह ने,ऐसा किया कमाल !
मिली नही इंसान को,.सुख की रोटी दाल !!
रमेश शर्मा..

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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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