सुख की पावन चूल रही

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- गज़ल/गीतिका

(विधा-बाल गीतिका)

नाना -नानी आनंद मगन, घररूपी बगिया फूल रही |
सब हँसते -गाते प्रीत रंग के सुख की पावन चूल रही |

आजाद हिंद की हर उमंग दिल धक-धक झूला पवन संग |
ऊपर को बढ़ता, लौटा तो, भय-गति पूरी प्रतिकूल रही|
नाना -नानी आनंद मगन,घररूपी बगिया फूल रही|
सब हँसते गाते प्रीति रंग के सुख की पावन चूल रही|

मामा आए, पापा आए, माँ को भी संग-संग लाए|
सद्प्रीति रंग, छाई उमंग ,प्रभु माया भी अनुकूल रही |
नाना-नानी आनंद मगन घररूपी बगिया फूल रही|
सब हँसते-गाते प्रीति रंग के सुख की पावन चूल रही|

नित पाठ राष्ट्रमय ज्ञान हेतु ,औ प्रीतिभाव विज्ञान हेतु|
जीवन उल्लास भरा मधुरिम, उर में आनंदी मूल रही |
नाना-नानी आनंद मगन ,घररूपी बगिया फूल रही|
सब हँसते -गाते प्रीत रंग के सुख की पावन चूल रही|

बृजेश कुमार नायक
'जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

Views 69
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
बृजेश कुमार नायक
Posts 129
Total Views 26.6k
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia