“सियासत”

ramprasad lilhare

रचनाकार- ramprasad lilhare

विधा- अन्य

सियासत

सियासत का असर देखो
खान पान भी बदनाम हो गये
सब्जी सारी हिन्दू हो गई
बकरे सारे मुसलमान हो गये।

कहा तो गया था जनाब
खाते में आयेंगे पन्द्रह लाख
हमारे खातें तो खाली ही रहे
नेता सारे धनवान हो गये।

कहा तो यूं भी गया था साहब
सबका साथ सबका विकास
हमनें तो साथ दिया पर
नेता सारे बेईमान हो गये।

कहा तो ये भी गया था साहब
जनता हमार भगवान औ सेवा हमारा काम
जनता तो जनता ही रही
नेता ही यहां भगवान हो गये।

स्वरचित
रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "

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ramprasad lilhare
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रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "चिखला तहसील किरनापुर जिला बालाघाट म.प्र। हास्य व्यंग्य कवि पसंदीदा छंद -दोहा, कुण्डलियाँ सभी प्रकार की कविता, शेर, हास्य व्यंग्य लिखना पसंद वर्तमान में शास उच्च माध्यमिक विद्यालय माटे किरनापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत। शिक्षा एम. ए हिन्दी साहित्य नेट उत्तीर्ण हिन्दी साहित्य। डी. एड। जन्म तिथि 21-04 -1985 मेरी दो कविता "आवाज़ "और "जनाबेआली " पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है।

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