सिमटी हैं कलियाँ अगर

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

छोड़ रही हर क्षेत्र में , आज बेटियां छाप !
कहने वाले क्यूं कहें, कन्या को अभिशाप !!

उत्तरदायी कौन है, ….किसकी है ये भूल ।
सिमटी हैं कलियाँ अगर, खिले नहीं हैं फूल ।।
रमेश शर्मा.

Views 14
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
RAMESH SHARMA
Posts 149
Total Views 1.9k
अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia