सिमटती मोहब्बत

Ashutosh Jadaun

रचनाकार- Ashutosh Jadaun

विधा- मुक्तक

साल दर साल सिमटती मोहब्बत
इस कदर "आशुतोष"
दिल मे धुंआ रख लोग
वफ़ा ढूढ़ते हैं ।
कश्ती मझधार मे डूबी
तब किस्मत को बेवफा मान
तारनहार ढूढ़ते हैं ।
गिला किस्मत का नही
खुद की गई बेरुखी जिंदगी
अब वो ओस मे भी
तपन ढूढ़ते हैं ।।

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Ashutosh Jadaun
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स्वागत हैं मेरे जज्बात साज़ गीतों में. कभी जब मैं यूँ ही तन्हा बैठता हूँ ,और अचानक ही पुरानी यादों की बारिशें,मेरे जेहन में बेतरतीब से ख्याल बूँद बनकर, मेरी कलम से कागज़ पे लफ्ज़ उकेरने को मचलने लगती है II

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