साहब बीमार हैं

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

रचनाकार- डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

विधा- कविता

अक्सर,
पद-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान
और लोकप्रियता के वायरस
साहब को बीमार कर देते हैं।
साब ! प्लीज मिल लें,
का सदवाक्य सुनते-सुनते
आम आदमी से
साहब कतराने लगे हैं,
और मंत्री जी के टेलीफोन का कैपशूल
साहब को केर देता है चंगा
आम आदमी का साब!
अब हो गया है बहुरंगा ।
साहब के बहुरंगेपन ने
आम आदमी को,
बीमार कर दिया है
और साहब
बीमार आम आदमी के लिए
बीमार है ।

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डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
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देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर' काव्य संग्रह मित्र प्रकाशन, कोलकाता के सहयोग से प्रकाशित। सामान्य ज्ञान दिग्दर्शन, दिल्ली : सम्पूर्ण अध्ययन, वेस्ट बंगाल : एट ए ग्लांस जैसी बहुचर्चित कृतियां 'उपकार प्रकाशन' से प्रकाशित। प्रत्येक चार माह पर समसामयिक सीरीज का लगातार प्रकाशन, 'अंचल भारती' पत्रिका का सह-सम्पादन ।मो9450017326

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