सावन

Neelam Sharma

रचनाकार- Neelam Sharma

विधा- दोहे

सावन दोहे

हरित चुनर वसुधा सजे, कर सोलह श्रृंगार।
छाती सावन माह में,पर्वों की है बहार।

सावन पूनो को मने,राखी का त्योहार।
परस्पर बढ़ता ही रहे,भ्रात-बहन का प्यार।

धीमी सी बौछार है, कभी मूसलाधार।
मिल सब सखियां झूलती, सावन झूला डार।

बांध जेवड़ी डाल पे,पेंघ बढावें नार।
सावन की बरसात में, भीगे सब नर नार।

छिपता घन पीछे रवि, अक्सर सावन मास।
नीलम बन तू रौशनी,फैला ज्ञान प्रकाश।

नीलम शर्मा

Views 22
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Neelam Sharma
Posts 213
Total Views 1.9k

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia