सावन के झूले

दिनेश एल०

रचनाकार- दिनेश एल० "जैहिंद"

विधा- कविता

सावन के झूले
// दिनेश एल० "जैहिंद"

आओ सखियों ! झूला झूलें,
पेंग बढ़ाकर नभ को छू लें ।
चलो चलें हम जी भर खेलें,
झूम-झूम खूब मज़े ले..लें ।।

आओ करें खुद की मनमानी,
अनसुनी करें ओरों की बानी ।
झूला झूलने को हमने ठानी,
आज हो जाए हमसे नदानी ।।

चलो चलें अब झूला डालें,
झूल-झूल कर मस्ती पा-लें ।।
झूम-झूम कर कजरी गालें,
गीत सावन के गुनगुना लें ।।

बूँदें बारिश की हमसे बोले,
मन की हमरे राज़ जो खोले ।।
पायल, चूड़ी खनके, डोले,
बोले…खेलो सावनी हिंडोले ।।

=== मौलिक ====
दिनेश एल० “जैहिंद”
28. 06. 2017

Sponsored
Views 82
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
दिनेश एल०
Posts 96
Total Views 1.2k
मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का अंग बना लिया और निरंतर कुछ न कुछ लिखते रहने की एक आदत-सी बन गई | फिर इस तरह से लेखन का एक लम्बा कारवाँ गुजर चुका है | लगभग १० वर्षों तक बतौर गीतकार फिल्मों मे भी संघर्ष कर चुका,,

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia