सावन का मौसम ( दोहे )

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- दोहे

कारे कारे बादरा ले गयी पवन उड़ाय।
ना बरखा ना साजना सावन सूखो जाय।

रंगीलो सावन आयो , धरा हरी चुनरिया।
गगन हो गया मस्त मगन, बरसे है बदरिया।।

देख के बुंदियाँ बारिश की, यूं मन मोरो रोय।
बरखा की पुरवा तेरी, याद दिलावत मोय।।

मौसम है यह सावन का,रोवत हम दिन रैन।
बिन तुमरे हर पल रहता, मनवा मेरा बेचैन।।

–रंजना माथुर दिनांक 29/07/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना)
©

Sponsored
Views 46
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Ranjana Mathur
Posts 127
Total Views 6.1k
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia