है नहीं रुपयों के आगे प्यार का अब मोल

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गीत

है नहीं रुपयों के आगे प्यार का अब मोल
पड़ गए हैं आज रिश्तों में अनेकों झोल

काम कर दिन रात अपने खो रहा ये होश
अब युवाओं में नहीं दिखता पुराना जोश
फोन कंप्यूटर बना इनका अलग संसार
कल्पना के दोस्त सारे कल्पना का प्यार
बात में भी अब कहाँ मिलते मधुर वो बोल
है नहीं रुपयों के आगे प्यार का अब मोल

अब पुराने से नहीं है तीज औ त्यौहार
औपचारिकता लिए हैं आपसी व्यवहार
नौकरों पर आज निर्भर हो रहे परिवार
लुप्त होते जा रहें हैं इसलिए संस्कार
बस दिखावे के यहाँ पर बज रहे अब ढोल
है नहीं रुपयों के आगे प्यार का अब मोल

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

Views 57
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr Archana Gupta
Posts 252
Total Views 17.4k
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
One comment