*** तेरी गली में हम***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

आये है घर छोड़ के अपना
साजन तेरी गली में हम
मिले चाहे ख़ुशी या ग़म
अपना घर छोड़ आये हम
मिलना अब हम तुम सनम
हम रहे ना हम तुम रहो तुम
साजन तेरी गली में हम
छोड़ सारे जहां को आये हम
चाहत में तेरी हम लूट गये
ये भी क्या किसी से कम
साजन तेरी गली में आये हम
कम से कम नज़रें करम कर
वरना जी ना पायेंगे हम
छोड़ बाबुल का घर
चले आये समझ अपना घर
मौत आने से पहले
अब ये निकले ना दम
मैंने चाहा है तुझको
ये क्या है कम
साजन तेरी गली में आये हम
छोड़ अपने बाबुल का घर
साजन तेरी गली में हम ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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