*साक्षात् शक्ति का रूप है नारी*

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- कविता

कभी माँ तो कभी पत्नी है नारी ,
कभी बहन तो कभी बेटी है नारी ।
मत समझना नारी को कमजोर ,
साक्षात् शक्ति का रुप है नारी ।।

कभी फूल तो कभी शोला है नारी ,
कभी दुर्गा तो कभी काली है नारी ।
मत समझना नारी को कमजोर ,
साक्षात् शक्ति का रुप है नारी ।।

एक सिक्के के दो पहलू हैं नर और नारी ,
बनते एक दूसरे के पूरक नर और नारी ।
मत समझना नारी को कमजोर ,
साक्षात् शक्ति का रुप है नारी ।।

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Neelam Ji
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मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

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