” साँझ देखो खिलखिलाई है ! अरुणिमा अम्बर पे छाई है ” !!

Bhagwati prasad Vyas

रचनाकार- Bhagwati prasad Vyas " neerad "

विधा- गीत

थका हारा दिन ,
हो गया है पस्त !
रात की जवनिया ,
है सदा अलमस्त !
सृजन की चाहतें –
भोर होते मुस्कराई हैं !!

चित्र खींचे जो ,
परिश्रम तूलिका है !
जो किया हासिल ,
स्वप्न भूमिका है !
उपलब्धियों ने फिर –
खुशियां थपथपाई हैं !!

डरे हुऐ हम ,
अनिश्चय ने छला !
जुटा ली हिम्मत ,
बहुत कुछ है टला !
हमकदम का साथ –
ज़िन्दगी गुनगुनाई है !!

साथ ना छूटे ,
इतनी सी ठानी है !
दौड़ समय की ,
हमसे सयानी है !
कल क्या होना –
उम्मीदें कसमसाई हैं !!

बृज व्यास

Views 106
Sponsored
Author
Bhagwati prasad Vyas
Posts 52
Total Views 16.2k
एम काम एल एल बी! स्वतंत्र लेखन ! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी आदि पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! कवि सम्मेलनों में रचना पाठ ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत आदि साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद आदि साझा काव्य संग्रह शीघ्र प्रकाश्य !
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia