सहज बने गह ज्ञान,वही तो सच्चा हीरा है |

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- मुक्तक

जोब विष को पीना जाने, वह ही तो मीरा है|
मूरख के आगे, अक्ली की बोली तीरा है|
कड़क बात से सीख ग्रहण कर ले जो तज,स्व ताप|
सहज बने गह ज्ञान, वही तो सच्चा हीरा है|
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2013 में प्रकाशित साहित्यकार Brijesh Nayak की (मेरी) कृति "जागा हिंदुस्तान चाहिए" का मुक्तक

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियों के प्रणेता

24-04-2017

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376व्हाट्सआप-9956928367 एवं8787045243

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