‘सहज के दोहे

DrMishr Sahaj

रचनाकार- DrMishr Sahaj

विधा- दोहे

अन्दर से बेशक हुआ, बिखरा – चकनाचूर.
चेहरे पर कम ना हुआ,पर पहला सा नूर.
'सहज' प्रेम से वास्ता,नफरत का क्या काम.
यहीं धरा रह जायगा,काला – गोरा चाम.
प्यार सदा देता 'सहज',बिन माँगे आनंद.
रह चाहे बाचाल या, रह बोली में मंद.
दुर्दिन में भी यदि रहे,तू अविचल निष्काम.
बना रहेगा हर समय, इक जैसा ही नाम.
@डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
अधिवक्ता/साहित्यकार
सर्वाधिकार सुरक्षित

Views 9
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
DrMishr Sahaj
Posts 13
Total Views 164

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia