“सरेआम मोहब्बत हैं तुझसे मुझे “(मुक्तक)

ramprasad lilhare

रचनाकार- ramprasad lilhare

विधा- मुक्तक

"सरेआम मोहब्बत हैं तुझसे मुझे "
(मुक्तक)
बाखुदा मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।
बेपनाँ मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।
मोहब्बत को मेरी यूँ मापा न कर।
बेइंतहा मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।

समंदर की गहराई तक मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।
फ़लक की ऊंचाई तक मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।
मोहब्बत को मेरी यूँ रूस्वा न कर।
कयामत की हदाई तक मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।

बेदाग मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।
बेबाक मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।
मोहब्बत का मेरी यूँ हिसाब न कर।
बेहिसाब मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।

सुबे-शाम मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।
बेलगाम मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।
मोहब्बत को मेरी यूँ छुपाया न कर।
सरेआम मोहब्बत हैं तुझसे मुझे।

रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "

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ramprasad lilhare
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रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "चिखला तहसील किरनापुर जिला बालाघाट म.प्र। हास्य व्यंग्य कवि पसंदीदा छंद -दोहा, कुण्डलियाँ सभी प्रकार की कविता, शेर, हास्य व्यंग्य लिखना पसंद वर्तमान में शास उच्च माध्यमिक विद्यालय माटे किरनापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत। शिक्षा एम. ए हिन्दी साहित्य नेट उत्तीर्ण हिन्दी साहित्य। डी. एड। जन्म तिथि 21-04 -1985 मेरी दो कविता "आवाज़ "और "जनाबेआली " पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है।

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