वर दे, वर दे, वर दे……

Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'

रचनाकार- Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'

विधा- गीत

(सरस्‍वती वन्‍दना)

वर दे, वर दे, वर दे…..

हे वीणाधारिणी वर दे.
हे हंसवाहिनी वर दे .
वर दे, वर दे, वर दे…..
हे निर्मल बुद्धिप्रदायिनी,
सद्बुद्धि सभी को प्रखर दे.

वर दे, वर दे, वर दे…..

हे चतुर्भुजा इक मुख,
हाथों में वीणा वेद लिए माँँ.
हे सरस्‍वती, हे आदिशक्ति,
तुम रूप अनेक लिए माँँ.

हे वीणावादिनी वर दे.
हे मयूरवाहिनी वर दे.
वर दे, वर दे, वर दे…..
हे वाणी विद्यादायिनी,
विद्या का सभी को शिखर दे.

वर दे, वर दे, वर दे…..

स्‍तुति करें साहित्‍य-कला-
संगीत में सबको स्‍वर दे.
हे प्रगति श्रेय वागीशा,
बुद्धि-वर्चस् सभी में भर दे.

हे ज्ञानदायिनी वर दे.
हे उत्‍कर्षदायिनी वर दे.
वर दे, वर दे, वर दे…..
हेे उज्‍ज्‍वला वागीश्‍वरी,
वाक्पटुता सभी को मुखर दे.

वर दे, वर दे, वर दे….

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Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
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1970 से साहित्‍य सेवा में संलग्‍न। अब तक 13 संकलन, 6 कृतियाँँ (नाटक, काव्‍य, लघुकथा, गीत संग्रह, नवगीत संग्रह ) प्रकाशित। 1993 से अबतक 6000 से अधिक हिन्‍दी वर्गपहेली 'अमर उजाला' व अन्‍य समाचार पत्रों में प्रकाशित। वर्तमान में ई पत्रिका 'अभिव्‍यक्त्‍िा-हिन्‍दी-ऑर्ग' पर 2010 से हिन्‍दी वर्ग पहेली निरंतर प्रकाशित। जून 2015 में राज.तक.वि.वि. कोटा से सेवानिवृत्‍त. साहित्‍य सेवा में संलग्‍न.

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